Thursday, June 25, 2015







वैजन्ती माला या जॉब के आंसू






"सीस मुकुट ,कटी काछनी ,उर वैजन्ती माल ,इही बानक मो मन बसे सदा बिहारी लाल

‘उर वैजन्ती मॉल’ वाले श्री कृष्ण कि शरण में सब जाना चाहते हें पर उर की माला का रहस्य क्या हें वैजन्ती वास्तव में घास कुल का एक पौधा  हेंजिसके बीजों को  माला के रूप में अत्यंत सरलता  से  पुरोया जाता हें यहाँ पोधा बृज के मैदानों में बहुतायत से मिलता हें ,द्वापर युग में भी सुलभ रहा होगा एसा हमें विश्वास है .महर्षि पाणिनि ,जो ईसापूर्व चौथी सदी में हुए  एवं  rigved   जिसे ई.पू.४५०० यiऔर भी प्राचीनमा ना जाता है मे भी इस का वर्णन है  अंग्रेजी के प्रसिद्द कवी  रोबर्ट फ्रोस्ट ने भी अपनी कविता में इस पोधे का जिक्र किया है.
श्री वल्लभाचार्य रचित मधुराष्टक में लिखा है'
 गुंजा मधुरा,माला मधुरा,यमुना मधुरा,वीची रसलिलं मधुरंकमलं मधुरंमधुराधिपते सर्वं मधुरं .|
मधुराधिपति श्री कृष्ण का सब कुछ  मधुर है.वैजयंती माला भी.
कृत  में इसे वैजयंती ,गवदू  या जरगदी और hindi  में गुर्लू या संकरु भी कहते हें इसका वानस्पतिक नाम है-कोइक्स  लेक्राएमा .     
इसके नाम से जुडी एक कहानी है 'ईसाइयो के धर्म ग्रन्थ बाइबिल  में एक कथा है कि एक जॉब नामक प्रभु भक्त था जो   भरे पूरे परिवार  व् सगे सम्बन्धियो के साथ सम्पन्न जीवन हा था.एक दिन उसकी भेंट "शेतान"से हो गई और उसके बाद धीरे- धीरे पूरा परिवार व धन नष्ट हो गया |शेष जीवन उसका पश्चाताप में रोते हुए ही बीता ,प्रभु भक्ति में व                                                                                                    
बहुत रोयाउसी के नाम पर इस पौधे को कहने लगे 'जॉब के आंसू'र  क्योंकि  वैजयंती के फल अर्थात                                                                                                                 
                              बीज भी आंसू या 
किसी भी बूँद के आकार के होते हें
कोएक्स मध्य एशिया में जन्म लेकर विश्व के अन्य क्षेत्रों मे  फैला ,गमलो में भी उगाया जाता  है .दक्षिनि  अमेरिका के कुछ देशों में इसकी खेती भी होती है .पूरे पूर्वी एशिया में  कोएक्स  के  सूखे बीज भी मिलते है जिन्हें पकाया जा सकता है .बीज प्राय:गोल होते है,सफ़ेद या बादामी  होते है |.
कोरिया में इनसे चाय aur  चीन में इन्हें पानी में उबाल कर चीनी डाल कर खाते है .कोरिया व चीन में इनसे शराब भी बनती है जिसे हांजी” 'कहा जाता है .कई परम्परागत ओषधियो में इनका प्रयोग होता है |
कोएक्स के बीज खाद्य और ओषध के रूप में भी प्रयुक्त होते है |
जोड़ों के तीव्र दर्द  व जोड़ों में तनाव होने पर इसका प्रभाव विस्मयकारी होता है इसमें पाए जाने वाला  १.कोएक्सोल -सूजन दूओर करके मांस पेशियों को ढीला करता है,एलर्जी व ज्वर को ठीक करता है|
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२.कोएक्सन -पेप्टाइड शुगर को कम करता है व अन्य कई पोषक तत्त्व,लिपिड ग्लैकोकोसाइड,फोसफोसलिपिड ,स्टेरोल्स व अमिनोएसिड,एडिनोसिन ,थाइमिनआदि की उपस्थिति इसमे पाई गयी है ||
कोएक्स के बीज रक्त शुद्धि के साथ मूत्र रोग भी ठीक करता है,,इसकी जड़ महिलायों में माहवारी की  अनियमितटा  को दूर करता है इसमें  ल्यूसीन,टाइरोसीन , आर्जिसीन ,कोएसिं न  आदि होते .|      
आधुनिक प्रयोग में-मस्से व दाद में,पुराने पेट सम्बन्धी विकारों में,दस्तो में ,फेफड़ो के रोगों में,अपेंदिसितिस -कोइक्स  लेक्राएमा .     


फिलिपिन्स  मे इसे 'एडलाईकहते हे,इसके बीजो को खाते हे बीजो मे चावल से अधिक प्रोटिन होता हे इनमे लगभग ७७.१६% कार्बो हाइ ड्रेट , प्रोटीन  ९.११%,व .४५% वसा होती है.पेट के रोगों के साथ रोगियों के पूर्ण स्वास्थ्य लाभ व पेट के कीड़े समाप्त करने के लिए भी इसे खिलाया जाताहै.
   भारत में वैजयंती माला के १०८ बीजों को एक धागे में पुरो कर माला बनाते हैतथा इसका प्रयोग वशीकरणआकर्शण वृद्धि व देवी साधना सिद्धि के लिए जाता है .इसे विष्णु माला भी कहते है.कई साधू  संत अपने आश्रम में गमलो में इसे लगाते हैभक्तो के लिए. विश्वास है कि इसके जाप से विष्णु,राम,कृष्ण  प्रसन्न होकर भक्त को समृद्धि  का वरदान देते है,जो निरंतर जाप में लींन  रहता है उसके सब दुःख दूर हो जाते है.
  वैजयंती के  बीजों से माला,गले के आभूषण व अन्य सामग्री परदे ,ट्रे आदि बनाते है .
    यदि भारतीय कृषि वैज्ञानिक व किसान वैजयंती का प्रचार ,प्रसार करें  इसकी फसल उगाई जा सकती है  इस प्रकार वैजयंती केवल पूजा कि वस्तु न रह कर नित्य उपयोग का अनाज बन सकता है और प्रोटीन का उत्तम स्रोत हो सकता है. संतोष व हर्ष  कि बात है कि बरेली कालेज के वनस्पति विज्ञान विभाग के उद्यान में वैजयंती के पौधे देखे जा  सकते हें .      


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